शनिवार 7 नवंबर 2026 - 06:19
शरई अहकाम | बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स का हुक्म

शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने ‘बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स’ से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई से ‘बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स’ के बारे में एक सवाल पूछा गया, जिसका जवाब पाठकों की जानकारी के लिए प्रस्तुत है।

बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स

सवाल:

1- एक व्यक्ति को सोने का सिक्का उपहार में मिला है और वह उसे इस इरादे से अपने पास रखता है कि भविष्य में उसकी कीमत बढ़ जाएगी। क्या अगले साल उसे महंगाई दर से अधिक बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स देना ज़रूरी होगा?

2- एक व्यक्ति का पेशा सोने की खरीद-बिक्री करना है। उसने अपनी तीन किलोग्राम सोने की मूल पूंजी का ख़ुम्स अदा कर दिया है। क्या अगले साल उसे महंगाई दर से अधिक बढ़ी हुई कीमत पर ख़ुम्स देना ज़रूरी होगा?

जवाब:

1- जब तक वह सोने का सिक्का बेच नहीं देता, उस पर ख़ुम्स वाजिब नहीं है। बेचने के बाद प्राप्त रकम बिक्री वाले साल की आमदनी में शामिल होगी। यदि वह रकम ख़ुम्स के साल के अंत तक बची रहती है और सालाना आवश्यक खर्चों में इस्तेमाल नहीं होती, तो एहतियाते वाजिब के अनुसार उस पर ख़ुम्स अदा करना होगा।

2- बाज़ार में कीमत में होने वाली वृद्धि (महंगाई दर से अधिक) ख़ुम्स के दायरे में आती है।

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